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मुजफ्फरपुर प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड: जांच में खुलासे तेज, आईसीयू वायरिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

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मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड मामले में जांच तेज हो गई है। प्रारंभिक रिपोर्ट में आईसीयू की वायरिंग, फायर सेफ्टी और निर्माण अनियमितताओं पर गंभीर सवाल सामने आए हैं।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर: बिहार के मुजफ्फरपुर में हुए चर्चित प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। जिला प्रशासन द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट मंगलवार को सौंप सकती है। इस बीच जांच के शुरुआती निष्कर्षों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली, तकनीकी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था, अब उसकी परतें धीरे-धीरे खुलती जा रही हैं और कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार जांच में सबसे बड़ा खुलासा आईसीयू यूनिट की इलेक्ट्रिकल व्यवस्था को लेकर हुआ है। बताया जा रहा है कि आईसीयू में केवल दो एयर कंडीशनर की क्षमता के अनुसार वायरिंग की गई थी, लेकिन वहां एक साथ छह एसी लगातार संचालित किए जा रहे थे। इस भारी ओवरलोड की वजह से वायरिंग सिस्टम पर लगातार दबाव बढ़ता गया और अंततः यही स्थिति शॉर्ट सर्किट का कारण बनी। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आग की शुरुआत इलेक्ट्रिकल सिस्टम से हुई और फिर धीरे-धीरे यह आईसीयू के भीतर फैली, जिसमें वेंटिलेटर और अन्य मेडिकल उपकरण भी चपेट में आ गए।

प्रत्यक्षदर्शियों और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर यह बात सामने आई है कि कुछ ही मिनटों में पूरा आईसीयू धुएं से भर गया और वहां अफरा-तफरी मच गई। मरीजों की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें तत्काल बाहर निकालना भी बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। इस दौरान जो नुकसान हुआ, उसने अस्पताल की आपातकालीन तैयारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि आईसीयू की वायरिंग कई जगहों पर मानकों के अनुरूप नहीं थी। कई हिस्सों में पुरानी और कमजोर तारों का उपयोग किया गया था, जिनमें सुरक्षा के न्यूनतम मानक भी पूरे नहीं किए गए थे। इसके अलावा फायर सेफ्टी सिस्टम को लेकर भी गंभीर खामियां सामने आई हैं। जांच टीम ने अस्पताल प्रबंधन से अग्निशमन उपकरणों, फायर हाइड्रेंट सिस्टम और कर्मचारियों के प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेज मांगे थे, लेकिन अब तक संतोषजनक जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया है।

मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब अस्पताल प्रबंधन भवन का स्वीकृत नक्शा भी प्रस्तुत करने में असमर्थ रहा। नगर निगम की टीम ने इस बिंदु पर चार दिनों तक इंतजार करने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि अस्पताल प्रशासन द्वारा भवन का कोई वैध नक्शा उपलब्ध नहीं कराया गया। इस तथ्य ने जांच एजेंसियों के संदेह को और अधिक गहरा कर दिया है और अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या भवन निर्माण में भी नियमों की अनदेखी की गई थी।

जानकारी के अनुसार प्रसाद हॉस्पिटल का उद्घाटन वर्ष 2014 में हुआ था। जांच टीम को आशंका है कि इसके बाद भवन में कई तरह के विस्तार और निर्माण कार्य बिना उचित स्वीकृति के किए गए होंगे। यदि यह बात सत्य साबित होती है, तो यह केवल अग्निकांड नहीं बल्कि एक बड़े स्तर की प्रशासनिक और निर्माण अनियमितता का मामला बन सकता है। इसी वजह से जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने भी स्वीकार किया है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और तकनीकी जानकारी अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। इससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, लेकिन साथ ही यह भी संकेत मिल रहे हैं कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से आगे बढ़ा रहा है। जांच टीम अब हर पहलू को बारीकी से खंगाल रही है ताकि घटना की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी तय की जा सके।

गौरतलब है कि 5 जून की तड़के करीब 3 बजे प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में भीषण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में अब तक सात मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। घटना के बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया था और अलग-अलग विभागों की टीमें जांच में जुट गई थीं। यह घटना पूरे राज्य में स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल बनकर उभरी है।

अब जैसे-जैसे जांच रिपोर्ट अंतिम रूप ले रही है, वैसे-वैसे यह स्पष्ट होता जा रहा है कि मामला केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी का परिणाम हो सकता है। आने वाले दिनों में रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय होने और प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना भी बढ़ गई है।

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